4. परिवहन, संचार एवं व्यापार ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न )

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1. भारतीय अर्थव्यवस्था में परिवहन एवं संचार साधनों की महत्ता को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-परिवहन एवं संचार के साधन भारत की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था को प्रगति की दिशा मिली है। परिवहन के साधन उपलब्ध रहने से कच्चे माल कारखाने तक एवं तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने में आसानी होती है। संचार के माध्यम राष्टीय स्तर से लेकर सामाजिक स्तर तक शांतिपूर्ण माहौल बनाने में सहायक होते हैं। भारत एक विशाल भौगोलिक आकार एवं विविध संस्कृतियों वाला देश है, जिसे परिवहन एवं संचार के साधन एक-दूसरे को जोड़ने का कार्य करते हैं। यही नहीं संचार के साधन सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर को ऊँचा उठाने में भी योगदान करते हैं। भारत, पाकिस्तान, नेपाल एवं बंगलादेश के साथ परिवहन संपर्क दो देशों के बीच की सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सूचक है।
परिवहन एवं संचार के बिना किसी भी प्रकार की आर्थिक प्रक्रिया लगभग असंभव है। ये साधन हमारे जैविक पक्ष को प्रभावित करती हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारा जीवन इन्हीं साधनों पर आश्रित है। जीवन जीने के लिए अनाज, शाक-सब्जियों तथा फलों की आपूर्ति में इन्हीं साधनों का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में परिवहन एवं संचार के साधन का महत्त्व अत्यधिक है।


2. यातायात के साधनों को देश की ‘जीवन रेखा’ क्यों कहा जाता है ?

उत्तर-यातायात के आधुनिक साधन किसी भी राष्ट्र और उसकी अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ हैं। यातायात के विकसित साधनों के माध्यम से पूरी पृथ्वी घर-आँगन सी बन चुकी है। इन साधनों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर कम समय में आसानी से पहुँचा जा सकता है। जो दरियाँ तय करने में हफ्तों-महीनों लगते थे। वह अब घंटों में तय हो जाती है। आज पर्वत, पठार, घाटियाँ, वन, सागर-महासागर बाधक नहीं रहे, आसानी से उन्हें पार किया जाता है।
परिवहन के सभी साधनों ने मिलकर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्रांति पैदा कर दी है। परिवहन के साधनों द्वारा उपयोगी वस्तुएँ बाजार तथा उपभोक्ताओं तक शीघ्रता से पहुँचाई जाती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में अशांति, सूखा, बाढ़ अथवा । महामारी जैसी समस्या का आसानी से मुकाबला किया जा सकता है और तत्काल सहायता पहुँचाने में सक्षम है। यातायात के साधनों के विकास ने देश के विभिन्न भागों के लोगों में भाईचारगी पैदा की है, राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है और आर्थिक मजबूती प्रदान की है।औद्योगिक विकास मूलतः यातायात के साधनों पर ही निर्भर है। कच्चा माल कारखाने तक लाने और तैयार माल बाजार तक ले जाने में यातायात के साधन ही। सहायक होते हैं।


3. भारत में संचार के प्रमुख साधन कौन-कौन हैं ? उनका विवरण दें ।

उत्तर-भारत में संचार के साधन डाक सेवा, मोबाइल, इंटरनेट, टेलीफोन सेवा, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा एवं समाचार पत्र हैं।

डाक सेवा- भारत में डाकघरों का जाल संसार में सबसे बड़ा है। इस समय देश में लगभग 1.5 लाख डाकघर हैं। इनकी अधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत है।

तार-टेलीफोन सेवाएँ- भारत में टेलीग्राम की सेवाएँ 1851 में आरंभ हुई और। टेलीफोन की सेवाएँ 1881 में आरंभ की गई। आज देश भर में 38338 टेलीफोन । एक्सचेंज काम कर रही है। भारत का दूरसंचार एशिया में सबसे आगे है। आज श-विदेश से संपर्क में इसका बड़ा योगदान है।

रेडियो टेलीविजन और सिनेमा- ये जनसंचार का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है। जिनसे मनोरंजन के साथ सूचनाओं और समाचारों का प्रसारण होता है। कम्प्यूटर और इंटरनेट की सविधाओं ने संचार में क्रांति उत्पन्न कर दी है। समाचार पत्रों और अन्य पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से संचार का महत्त्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। पुस्तक ज्ञान और सचना के माध्यम हैं।


4. 1991 की नई आर्थिक नीति की समीक्षा करें। क्या यह राष्ट्रहित के अनुकूल हुआ ?

उत्तर-1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत ने आर्थिक सुधारों के लिए कई क्षेत्रों में नई-नई नीतियाँ बनायी जिसे सम्मिलित रूप से नई आर्थिक नीति के नाम से जाना जाता है।
भारत द्वारा विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता स्वीकार करने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण का प्रभाव पडना प्रारंभ हो गया। विश्व की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत के द्वार खुल गये और भारतीय कंपनियाँ भी पूरे विश्व में फैलकर व्यापार करने लगी। इसके पक्ष या विपक्ष में भारत के अर्थशास्त्रियों के विचार अलग-अलग हैं। कुछ इसे राष्ट्रहित में मानते हैं और कुछ इसे राष्ट्रहित में नहीं मानते।
राष्ट्रहित के अनुकूल मानने वालों का कहना है कि-

(i) इससे उत्पादकता बढ़ेगी।
(ii) लोगों का जीवन-स्तर सुधरेगा।
(iii) प्रतिस्पर्धा के कारण कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।
(iv) अर्थव्यवस्था की संरचना में सुधार होगा।
(v) अच्छी वस्तुएँ भी कम मूल्य पर उपलब्ध हो सकेंगी।
(vi) राष्ट्रीय संसाधनों का समुचित उपयोग होगा।

राष्ट्रहित के प्रतिकूल मानने वालों का कहना है कि –

(i) पूँजी-प्रधान उद्योगों का महत्त्व बढ़ने से कंप्यूटर आदि का उपयोग बढ़ेगा और रोजगार का अवसर घटेगा। बेरोजगारी बढेगी।
(ii)भारत में लघु और कुटीर उद्योग की बहुलता है। विश्व बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा में ये टिक नहीं पायेंगे और लघु एवं कुटीर उद्योग के लिए । वह शुभ घड़ी न होगी।
(iii) महँगाई बढ़ेगी, गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों के लिए कठिन घड़ी होगी। बाजार माँग के अनुसार नकदी फसल का उत्पादन बढ़ेगा और खाद्यान्न का उत्पादन कम हो सकेगा।


5. भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर-स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में औद्योगिक एवं आर्थिक विकास तेजी है। अत: आज भारत का व्यापारिक संबंध विश्व के अनेक देशों के साथ गहरा है जो आर्थिक विकास के साथ लगातार विकसित होता जा रहा है। भारत का 1950-51 में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 1,214 करोड़ रुपये का हुआ था जो 2007-08 में बढ़कर 16,053022 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। परंतु यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि व्यापार में वृद्धि के बावजूद निर्यात की दर आयात की अपेक्षा घट गया है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, प्रतिकल व्यापार संतुलन का द्योतक है जो देश के हित में नहीं है। फिर भी इन दिनों भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप सूचना-प्रौद्योगिकी के व्यापार से भी भारत अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।


6. भारत में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सड़कों का विस्तत विवरण दें।

उत्तर-भारत में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के सडकों का ब्योरा इस प्रकार है –

(i).राष्ट्रीय राजमार्ग- यह देश के विभिन्न राज्यों को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस दृष्टि से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 देश का सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह 2,369 किमी० की लम्बाई में वाराणसी, जबलपुर, नागपुर, हैदराबाद, बंगलूरू एवं मदुरै होते कन्याकुमारी तक जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग की देख-रेख | का दायित्व केंद्र सरकार पर है। देश भर में 228 राष्ट्रीय राजमार्ग 79,116 किमी० क्षेत्र में फैले हुए हैं।

(ii) राज्य राजमार्ग- यह राजमार्ग राज्यों की राजधानियों को विभिन्न जिला । मुख्यालयों को जोड़ने का काम करती हैं। इसके निर्माण एवं देख-रेख का दायित्व । राज्य सरकारों पर है। ये सभी राजमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े होते हैं। कुल ल० . 1 24.65.877 कि०मी० है।

(ii) जिला सड़कें – जिला सड़कें राज्यों के विभिन्न जिला मुख्यालयों एवं । शहरों को जोड़ने का काम करती हैं। देश के कुल सड़कों का 14% जिला सड़कें । हैं। इनका देख-रेख व निर्माण की जिम्मेवारी राज्य सरकार का है। क्षेत्रीय विकास में इनका अधिक महत्त्व है।
(iv) ग्रामीण सड़कें –ये सड़कें विभिन्न गाँवों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है। देश के कुल सड़कों में इनका हिस्सा 14% है। क्षेत्रीय विकास में इन सड़कों की अहम भूमिका होती है। इनके निर्माण एवं देख-रेख की जिम्मेवारी राज्य सरकार की है।


7. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसे कहते हैं? आजादी के बाद इसमें आयी प्रगति का वर्णन करें।

उत्तर-जब व्यापार दो या दो से अधिक देशों के बीच हो तो उसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। किसी देश का विकसित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उसकी आर्थिक सम्पन्नता का प्रतीक है। इसलिए किसी देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उसका आर्थिक मापदंड कहते हैं। इस व्यापार के दो पहलू हैं-आयात एवं निर्यात।
आजादी के बाद भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। यह बढ़ोत्तरी व्यापार की मात्रा एवं मूल्य दोनों में हुई है। भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सन् 1950-51 में मात्र 1,314 करोड़ रुपयों का था जो 2007-08 में बढ़कर 16,05,022 करोड़ रुपयों का हो गया। यह प्रगति संतोषजनक नहीं है क्योंकि कुल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत का योगदान 1% से भी कम है। भारत में निर्यात की अपेक्षा आयात अभी भी अधिक है। कार ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं वृद्धि के लिए विदेश व्यापार नीति को उदार किया है एवं विशेष आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण भी किया जा रहा है।


8. व्यापार में भाग लेने वाले भारत के प्रमुख पत्तनों का वर्णन करें।

उत्तर -भारत के पश्चिमी तट पर कांडला, मुंबई, मार्मगाओ, न्यू मंगलूर और कोच्चि पत्तन मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भाग लेते हैं। मुंबई में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर एक और पत्तन का विकास किया गया है। मुंबई भारत का सबसे बड़ा पत्तन है, खनिज तेल का व्यापार यहीं से होता है। न्यू मंगलौर का विकास लौह-अयस्क के निर्यात के लिए हुआ है। कोच्चि का उपयोग रबर, कहवा, नारियल तथा गरम मसाले के लिए हैं। भारत के पूर्वी तट पर तूतीकोरिन, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पाराद्वीप और कोलकात्ता-हल्दिया अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भाग लेते हैं। तूतीकोरिन में कोयले से लदे जहाज पहुँचते हैं। चेन्नई खनिज तेल और लौह-अयस्क का व्यापार करता है। विशाखापत्तनम से मैंगनीज, लौह-अयस्क और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया . जाता है। पाराद्वीप से लौह-अयस्क का निर्यात किया जाता है। कोलकाता से चाय, हल्दिया से कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार किया जाता है।


9. भारत के आंतरिक जलमार्गों का वर्णन करें।

उत्तर-भारत में पाँच आंतरिक जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। ये निम्नलिखित हैं –

(i) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 1 – यह इलाहाबाद से हल्दिया तक पटना होकर जाती है। यह गंगा नदी पर है तथा इसकी कुल लंबाई 1,620 किमी० है।

(ii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 2- यह असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाई गई है जो असम के सदिया नामक स्थान से धुबरी तक जाती है। इसमें भारत के साथ बांग्लादेश की साझेदारी है। इसकी कुल लंबाई 891 किमी० है।

(iii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 3- यह पश्चिमी तट पर केरल में स्थित है। यह कोल्लम से कोट्टापुरम तक जाती है। यह 205 किमी० लंबा है।

(iv) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या- गोदावरी-कृष्णा नदियों तथा पुडुचेरी-काकीनाडा नहर द्वारा आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और पुडुचेरी तक 1,095 किमी० लंबी है।

(v)राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 5- यह उड़िसा में इस्ट कोस्ट नहर, मताई नदी. – ब्राह्मणी नदी एतं महानदी डेल्टा के सहारे 623 किमी० लंबा निर्माणाधीन है।


10. भारत को रेलमार्गों से क्या लाभ मिला है ? पहाड़ी भागों की अपेक्षा मैदानी भागों में रेलमार्ग का अधिक विस्तार क्यों है ?

उत्तर -भारत का रेलमार्ग राष्ट्रीय संपत्ति है। इससे माल ढोने, यात्रियों के आवागमन और देश के विभिन्न भागों में खाद्यान्न, उर्वरक, खनिज तेल, कोयला अन्य खनिजों तथा औद्योगिक उत्पादों को लाने ले जाने में बड़ा लाभ मिलता है। नित्य दिन 10 हजार से ऊपर रेलगाड़ियाँ चलती है।
मैदानी भाग उपजाऊ और समतल होने के कारण कृषि उत्पाद में आगे है। यहाँ कृषि पर आधारित उद्योग का विकास हुआ है। जनसंख्या भी मैदानी भाग में अधिक पायी जाती है। इसलिए मैदानी भाग में रेलमार्ग का विस्तार अधिक हुआ है।
दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में रेलमार्ग के निर्माण में कठिनाई होती है क्योंकि यह समतल भूमि नहीं होती है। कृषि और उद्योग का विकास भी बहुत हुआ है और जनसंख्या भी मैदानी भाग की तुलना में कम पायी जाती है।


11. एक्सप्रेस-वे के अंतर्गत कौन-कौन से राज्यमागों को शामिल किया गया है ?

उत्तर-एक्सप्रेस-वे चार लेन वाली अत्याधुनिक सड़कों को बनाया गया है। इसके अंतर्गत कोलकाला-दमदम राजमार्ग, अहमदाबाद राजमार्ग, मुंबई पश्चिमी तटीय राजमार्ग शामिल हैं। मुंबई-पुणे राजमार्ग देश का पहला अंतर्राष्टीय स्तर का राजमार्ग है। इन सड़कों पर गाड़ियों की गति बहुत अधिक होती है और इन्हें अतिरिक्त टोल-टैक्स भी देना पड़ता है।


12. भारत में सड़कों की सघनता किन दो क्षेत्रों में अधिक है ? और क्यों ?

उत्तर-भारत में सड़कों की सघनता निम्न दो क्षेत्र में अधिक पायी जाती है।

(i) गंगा के मैदान में (बंगाल से लेकर पंजाब तक)
(ii) तमिलनाडु, केरल (पूर्वी तट से पश्चिमी तट तक)
उत्तरी मैदानी भाग में सड़कों का धनापन अधिक है। परंतु पक्की सडकों लंबाई कम है। परंतु दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य और केरल राज्य में पानी सड़कें अधिक हैं।
इन क्षेत्रों में सड़कों का घनापन अधिक होने का कारण यह है कि उत्तर भारत का मैदानी क्षेत्र हो या दक्षिण का तमिलनाड या केरल राज्य हो, यह सभी क्षेत्र की प्रधान क्षेत्र है, समतल भूभाग है, अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है इसलिए इन दो में सड़कों की सघनता अधिक पायी जाती है।


13. भारत में पाइपलाइन परिवहन का वर्णन कीजिए।

उत्तर-शहरी क्षेत्रों में घर-घर पानी पहुँचाने के लिए पाइप का प्रयोग पहले से ही प्रचलित है। परंतु वर्तमान समय में परिवहन के रूप में पाइपलाइन का महत्त्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पाइपलाइन का उपयोग तरल पदार्थों जैसे पेट्रोलियम । के साथ ही गैस के परिवहन के लिए भी किया जाने लगा है। पाइपलाइनों के द्वारा
मरुस्थलों, जंगलों, पर्वतीय क्षेत्रों, मैदानी भागों और यहाँ तक कि समुद्र के नीचे से भी परिवहन किया जाना संभव है। इस परिवहन के साधन को बनाने में एक ही बार खर्च करना पड़ता है। रख-रखाव पर खर्च बहुत कम करना पड़ता है। यह अन्य परिवहन के साधनों से सस्ता साधन है। यहाँ इसका भविष्य तेल और प्राकृतिक गैस उद्योग पर निर्भर है। देश के कच्चे तेल का उत्पादन क्षेत्र से शोधन स्थल तक और शोधन स्थल से बाजार तक पाइपलाइन से ही भेजा जाता है।
देश में पेट्रोलियम उत्पादन क्षेत्रों में वृद्धि तथा आयात में वृद्धि के साथ ही । पाइपलाइन मार्ग का विस्तार भी क्रमशः होता जा रहा है। इसकी सघनता देश के
पश्चिमी भागों में ज्यादा है। 1985 ई० में देश में पाइपलाइनों का विस्तार मात्र 6535 किमी० था, जो 2004 ई० में 18546 किमी० हो गया है।
भारत के पाइपलाइनों को मुख्यतः दो वर्गों में रखा जाता है-
(I) तेल पाइपलाइन

(i) कच्चा तेल पाइपलाइन  (ii) तेल उत्पाद पाइपलाइन

(II) गैस पाइपलाइन

(i) एल०पी०जी० पाइपलाइन  (ii) एच०बी०जे० पाइपलाइन


Geography ( भूगोल )  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1 भारत : संसाधन एवं उपयोग
2 कृषि ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न )
3 निर्माण उद्योग ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न )
4 परिवहन, संचार एवं व्यापार
5 बिहार : कृषि एवं वन संसाधन
6 मानचित्र अध्ययन ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न )

History ( इतिहास ) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1 यूरोप में राष्ट्रवाद
2 समाजवाद एवं साम्यवाद
3 हिंद-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन
4 भारत में राष्ट्रवाद
5 अर्थव्यवस्था और आजीविका
6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन
7 व्यापार और भूमंडलीकरण
8 प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद

Political Science दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1 लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी
2 सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली
3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष
4 लोकतंत्र की उपलब्धियाँ
5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ

Economics ( अर्थशास्त्र ) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1 अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास
2 राज्य एवं राष्ट्र की आय
3 मुद्रा, बचत एवं साख
4 हमारी वित्तीय संस्थाएँ
5 रोजगार एवं सेवाएँ
6 वैश्वीकरण ( लघु उत्तरीय प्रश्न )
7 उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण
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