वर्णिका भाग 2
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वर्णिका भाग 2 कक्षा 10 | पाठ – 3 माँ कहानी

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2. मंगु के प्रति माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में जो फर्क है, उसे अपने शब्दों में लिखें ?

उत्तर – मंगु जन्मजात पागल और मूक थी, फिर भी माँ का व्यवहार वात्सल्यपूर्ण था। वह उसे टट्टी, पेशाब कराती, खिलाती और साथ सोलाती थी। किन्तु भाभियाँ उससे घृणा करती थीं। बहन कहती कि माँ का लाड़-प्यार उसे अधिक पागल बना दिया है। भाईयों का व्यवहार भी उसके साथ प्यारयुक्त नहीं था।


3. क्या माँ अपने अन्य संतानों को भूल गई थी ?

उत्तर- माँ को दो पुत्र और एक पुत्री और भी है। पुत्र पढ़-लिखकर शहर में नौकरी करते थे और पुत्री अपने ससुराल में रहती थी। अब सामने पगली और गूंगी मंगु थी। इस स्थिति में उसका समग्र मातृत्व मंगु पर ही न्योछावर हो गया था। इसका यह अर्थ नहीं कि वह अन्य सन्तानों को भूल गई थी।


 4.माँ जी मंगू की श्रेणी में कैसे मिल गई ?

उत्तर- माँ जी मंगु को अस्पताल में रखकर पुत्र के साथ घर तो लौट गई किन्तु उनका हृदय मंगु के बारे में ही सोच रहा था। सब दिन साथ रही बेटी का विछोह उन्हें बेचैन कर रहा था। अन्तर्द्वन्द्व उन्हें एक पल भी शांत नहीं रहने दे रहा था। मंग की चिन्ता ही माँ जी को मंग की श्रेणी में मिला दिया अर्थात व नी सोचने-समझने की शक्ति खोकर पागल हो गई।


5. माँ मंग को अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती? विचार करें ?

उत्तर-माँ समझती थी कि मैं माँ होकर सेवा नहीं कर सकती, तो अस्पताल वालों को क्या पड़ी है? अपंग जानवरों की गोशालाओं में भर्ती कर अपने जैसा ही यह कहा जायेगा। उसे कौन प्यार से खिलायेगा ? कौन टट्टी-पेशाब करायेगा ? गीला बिछावन कौन बदलेगा और कौन साथ सोलायेगा? इन बातों को सोंचती हुई वह अपने शरीर से उत्पन्न पुत्री को अस्पताल में भर्ती कराना नहीं चाहती थी।


 1.माँ कहानी के द्वारा कवि क्या सन्देश देता है ?

उत्तर-  इस कहानी में माँ की ममता और वात्सल्य की भावना को कथाकार ने स्पष्ट करते हुए हमें ‘मातृदेवोभवः’ का पाठ स्मरण कराया है। माँ की सेवा बलिदान और त्याग के लिए हम उसे क्या प्रतिदान दे सकते हैं ! माँ के उस ममता को प्राप्त करने के लिए ही तो हमारे ऋषियों ने ब्रह्म को शक्ति अर्थात् मातृरूप में देखना शुरू किया क्योंकि जितना हमारे समीप माँ हो सकती है, हमारे लिए जितना

 

 


वर्णिका भाग 2 माँ Hindi Subjective Question 


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