ढहते विश्वास | पाठ -2 | SUBJECTIVE QUESTION – वर्णिका भाग 2 | कक्षा -10

वर्णिका भाग 2 कक्षा 10 | पाठ -2 ढहते विश्वास

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1. लक्ष्मी क्यों पिछड़ गई ?

उत्तर:-लक्ष्मी के साथ दो छोटी बच्चियाँ, गोद में बच्चा और माथे पर चिउड़ा वर्तन और कपडे भरे बोरी थी । अतः वह पिछड़ गई।


2. लक्ष्मी के व्यक्तित्व पर विचार करें।

उत्तर:- लक्ष्मी इस कहानी का प्रमुख पात्र है। उसके व्यक्तित्व में कूट-कूटकर दृढ़ता और साहस भरा है। गाँव में मात्र एक वीघा  उसकी भू-खंड है, पर पूर्व अनुभव के आधार पर न उसने घर छोड़ी और न गाँव । अच्युत को भी समाज रक्षा में लगा दिया। उसके हृदय में मातृत्व की जलधार बहती है। अच्युत के लिए तो उसने विलम्व किया ही मूछों से जागने पर एक मुर्दे बच्चे को छाती में भींच लेती है। इस प्रकार लक्ष्मी के व्यक्तित्व में नारी सुलभ मातृत्व के साथ-साथ दृढ़ता और साहस का अच्छा मिश्रण है।


3. विपत्ति अकेले न आकर संगी-साथियों के साथ आती है, कहानी के आधार पर स्पष्ट करें ।

उत्तर:- कहानी में उल्लिखित उपर्युक्त उक्ति सत्य है। तूफान के बाद सूखा और उसके बाद बाढ़ का प्रकोप ही सिद्ध करता है कि विपत्ति अकेले नहीं आकर संगी-साथियों के साथ आती है।


4. कहानी में आये बाढ़ के दृश्यों का चित्रण अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।

उत्तर:- दलेई बाँध पर काफी श्रम करके भी लोग सफल न हो सके और बाँध टूट ही गया। सूचना मिलते ही लोग टीले की ओर दौड़ पड़े पर पानी का बहाव तेज था। कुछ लोग रास्ते में बह गया। स्कूल भी पानी से भर गया। घुटने भर पानी में लोग छत पर खड़े रहे पर कमरे वालों की क्या गति हुई यह किसी को मालूम नहीं । लक्ष्मी आदि कुछ लोग वृक्ष की जटा और डाल पकड़ कर लटक गये । चण्डेश्वरी चबुतरा भी पानी से भर गया। लोग अफरा-तफरी में जान बचाने को आकुल-व्याकुल थे पर कोई देव-शक्ति उन्हें रक्षा नहीं कर सकी । इस विभीषिका में गाँव का विनाश हो गया।


5. लक्ष्मी कौन थी ? उसकी पारिवारिक परिस्थिति का चित्र प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:-लक्ष्मी एक दीन महिला थी जिसके पति कलकत्ता में रहकर नौकरी करता था। वह जो पैसा भेजता था, उससे बच्चों के साथ लक्ष्मी का भरण-पोषण संभव नहीं था। उसके पास मात्र एक बीघा भूखंड था । प्रकृति के प्रकोप के कारण उसमें हल चलवाने के पैसे भी बेकार जाते थे । अत: तहसीलदार के यहाँ काम-काज करके वह जीविका चलाती थी। उसका बड़ा बेटा अच्युत दो बेटियाँ तथा एक नन्हा मुन्ना और अपने स्वयं का भरण-पोषण की सारी जिम्मेवारी उसी  पर थी । अतः उसका पारिवारिक स्थिति दयनीय थी ।


6. कहानी के आधार पर प्रमाणित करे कि उड़ीसा का जन-जीवन बाढ़ और सूखा से काफी प्रभावित रहा है ?

उत्तर. उड़ीसा के जन-जीवन का सफल चितेरा सातकोडी होता ने अपनी इस कहानी में उड़ीसा की बाढ़ और सूखा का प्रत्यक्ष प्रतिविम्ब  प्रस्तुत किया है। तूफान के बाद सूखा और उसके बाद बाढ वहाँ के जनजीवन को अस्त-व्यस्त करके हर समय बेसहारा बना देता है । महानदी का हीराकुंड बाँध और अयाति द्वारा निर्मित। पत्थर का बाँध भी उन्हें रक्षा नहीं कर पाते । सूखे में विचई तक सूख जाते हैं और बाढ़ में असंख्य धन-जन की हानि होती रहती है।


7. ‘क्या ढहते  विश्वास’ कहानी के शीर्षक सार्थक है? विचार करें।

उत्तर:- घटित घटना के आधार पर ही सिद्धहस्त लेखन ने कहानी का शीर्षक: ‘ढहते विश्वास’ रखा है। इस भयंकर बाढ़ के समय लोग बड़ी आशा और उम्मीद से माँ मंडेश्वरी की शरणागत हुए, जहाँ चैत की संक्रान्ति में देवी की पूजा होती थी, बलि दी जाती थी। पर आज भगवान, शिव और माँ मुंडेश्वरी कोई सहायता नहीं कर सके । अब लोगों को किसी पर भरोसा नहीं रह गया । देवी-देवताओं पर से विश्वास उठने लगा है। अत: कहानी का शीर्षक सटीक और सत्य है।


8, ढहते  विश्वास’ कहानी का सारांश प्रस्तुत करें

उत्तर:- लक्ष्मी वर्षा की निरन्तरता में भीषण बाढ़ आने की बात सोचकर दु:खी हो रही थी। उसके पति लक्ष्मण कलकत्ता की नौकरी में कुछ पैसे भेज देता था और वह स्वयं तहसीलदार का छिटपुट काम करके बच्चों के साथ अपना भरण-पोषण  कर रही थी। भूमि की छोटा टुकड़ा तो प्रकृति-प्रकोप से ही तबाह रहता है। कटक में लौटा गुणनिधि महानदी की इस बाँध की सुरक्षा के लिए गाँव के युवकों को स्वयंसेवी दल बनाकर बाँध की सुरक्षा में सब संलग्न थे । लक्ष्मी भी बडे लड़के को बाँध पर भेजकर दो लड़कियों और एक साल के लड़का के साथ घर पर है। लक्ष्मी भी पूर्व के आधार पर कुछ चिउड़ा बर्तन-कपड़ा संग्रह कर लिया । गाय, बकरियों के पगहा खोल दिया अच्युत तो बाँध पर ही जूझ रहा था। बाढ़ आ गई और शोर मच गया। गुणनिधि-काम में जुटा था। लोगों में जोश भर रहा था और लोगों को ऊँचे पर जाने का निर्देश भी दे रहा था। सब लोगों का विश्वास आशंका में बदल गया। लोग काँपते पैरों से टीले की ओर भागे। स्कूल में भर गये । देवी स्थान भी भर गया। लोग हतास थे अब तो केवल माँ चंडेश्वरी का ही भरोसा है। लक्ष्मी भी अच्यूत की आशा छोड़कर जैसे-तैसे बच्चों को लेकर भाग रही थी क्योंकि बाढ़ वृक्ष घर सबों को जल्दी-जल्दी लील रही थी। शिव मन्दिर के समीप पानी के बहाव इतना बढ़ गया कि लक्ष्मी बरगद की जटा में लटककर पेड़ पर चढ़ गई । वह बेहोश हो गई । कोई किसी की पुकार सुननेवाला नहीं। टीले पर लोग अपने को खोज रहे थे। स्कूल भी डूब चुका था। अतः लोग कमर भर पानी में किसी प्रकार खड़े थे। लक्ष्मी को होश आने पर उसका छोटा लडका लापता था। वह रो चिल्ला रहा थी, पर सुननेवाला कौन था ? लोगों का विश्वास देवी-देवताओं पर से भी उठ गया क्योंकि इनपर बार-बार विश्वास करके लोग, मात्र ठगे जाते रहे हैं। लक्ष्मी ने पुनः पीछे देखा पर उसकी दृष्टि शुन्य थी। फिर भी एक शिशु शव को उसने पेड़ की तने पर से उठा लिया और सीने से भींच लिया यद्यपि वह उसक पुत्र का शव नहीं था।


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